खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी को उपयोग करते समय क्या सावधानियां बरतें

खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी को उपयोग करते समय क्या सावधानियां बरतें 

खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी को उपयोग करते समय क्या सावधानियां बरतें
खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी को उपयोग करते समय क्या सावधानियां बरतें 


फसल में खरपतवारनाशी अथवा रसायन का प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए -

  • फसलों के अनुसार वर्णात्मक  ( Selective ) शाकनाशी का ही प्रयोग करें। जैसे - मक्का में सिमेजिन, गेहूं में 2, 4-D एरीटान व ट्रिब्यूनिल आदि।
  • फसलों में विभिन्न शाकनाशियों को सिफारिश की गई मात्रा प्रति इकाई क्षेत्र का ही प्रयोग करें। अधिक मात्रा प्रयोग करने से फसल पर हानिकारक प्रभाव हो सकता है तथा कम मात्रा प्रयोग करने से खरपतवारों का नियंत्रण आसानी से नहीं हो पाता।

  • शाकनाशी रसायन उसके निर्धारित समय जैसे - बुवाई से पूर्व, अंकुरण से पूर्व या अंकुरण के बाद निश्चित समय पर ही छिडकें अन्यथा शाकनाशी का प्रभाव घट जाएगा व फसल को हानि का डर रहेगा।
  • घोल बनाने के लिए वाहक पदार्थों की मात्रा स्प्रेयर के प्रकार व रसायन की किस्म पर निर्भर करती है। सस्पर्शी ( Contact ) शाकनाशी के घोल के लिए अधिक पानी व स्थानांतरित शाकनाशी के घोल के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है।
  • निम्न आयतन स्प्रेयर से कम घोल अधिक क्षेत्र में, व उच्च रसायन स्प्रेयर से अधिक घोल छिड़का जाता है। बोआई के बाद साधारणतया 800-1000 लीटर घोल प्रति हेक्टेयर छिड़कने की आवश्यकता होती है।
  • अंकुरण के बाद छिडके जाने वाले रसायनों के घोल में चिपकने वाले पदार्थ अथवा पृष्ठ सक्रिय कर्मक ( surface active agent ) जैसे टीपाल या सेंडोबिच 1 मिली/ली. घोल में मिलाने चाहिए। आमतौर पर चिपकने वाले पदार्थ रसायनों में पहले से ही मिले होते हैं।
  • पूर्ण रूप से रसायन अधिकतर जल मिश्रीय अथवा निलम्बन घोल के रूप में होते हैं। छिड़काव करते समय इन्हें हिलाते रहना चाहिए।
  • बोआई से पूर्व व अंकुरण से पूर्व छिड़के जाने वाले रसायनों के लिए भूमि में नमी की पर्याप्त मात्रा होना आवश्यक है ताकि रसायन का प्रभाव ठीक से हो सके। नमी की कमी होने पर हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। अधिक पानी लगाने से रसायन भूमि में नीचे जा सकता है।
  • शाकनाशी का खेत में समान वितरण होना चाहिए। असमान वितरण में, जहां पर रसायन कम मात्रा में गिर है, खरपतवारों को नियंत्रण नहीं कर पाएगा व जहां अधिक गिरा है वहां फसल को हानि पहुंच सकती है।
  • छिड़काव करते समय घोल की फुहार पास के दूसरे खेत की फसल पर नहीं पढ़नी चाहिए। जैसे - अगर गेहूं में 2, 4-D. का घोल छिड़क रहे हैं और पास के खेत में सरसों पर अगर इसकी फुहार चली जाए तो सरसों के प्रभावित पौधे नष्ट हो जाएंगे।
  • रसायनों का छिड़काव करते समय किसान को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिेए जिससे कि रसायन की फुहार किसान के शरीर के ऊपर न आए। नहीं तो किसान के शरीर को अत्यधिक हानि हो सकती है।

खरपतवारनाशी एवं कीटनाशी को उपयोग करते समय क्या सावधानियां बरतें 

फसल में कीटनाशकों अथवा रसायन का प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए -

  • प्रत्येक रसायन हानिकारक होता है। इसके बारे में बतायी गई सावधानी व सिफारिशें अवश्य अपनानी चाहिए।
  • पैकिंग के डिब्बों पर लगे लेबिल को ध्यानपूर्वक रसायन प्रयोग करने से पूर्व अवश्य पढ़ लेना चाहिए। रसायन की पहचान रंग को देखकर या सूँघकर न करें।
  • प्रयोग करने के बाद खाली डिब्बों को, पानी के स्त्रोत से दूर, निर्जन स्थानों में भूमि में 50 सेंमी गहरे गाड़ देना चाहिए।
  • रसायन का प्रयोग लेबिल पर लिखे समय के अनुसार ही करना चाहिए। दो छिड़काव के बीच के समय का भी ध्यान रखें। 
  • चारागाह में निश्चित समय से पहले व अन्य फसलों में चारा निश्चित समय 15-20 दिन, से पहले न चरायें। अन्य फसलों में, फसल की कटाई, रसायन छिड़कने के निश्चित समय बाद ही करें।
  • रसायन का प्रयोग करने से पहले, लेबिल पर लिखी गई सूचनाएं या साथ में दिए गए साहित्य को ध्यानपूर्वक पढ़कर, तकनीकी जानकारी लेकर ही रसायन का प्रयोग करें।
  • रसायन का प्रयोग करते समय आंखों में चश्में, हाथों में रबर के दस्ताने, अन्य सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर लेबिल की सूचना के अनुसार ही कार्य प्रारंभ करें।
  • निकट के सहनशील, फसलों के पौधों को छिड़काव से बचाएं।
  • छिड़काव या धूलि का बिखेरना, उस समय करना चाहिए जब वायु की गति तेज न हो या बहुत ही मन्द हो।
  • रसायन का छिड़काव करते समय वायु दिशा का भी ध्यान रखना अति आवश्यक है।
  • जिस यंत्र से शाकनाशी खेत में देना हो उसका अंशांकन ( Calibration ) कर लेना चाहिए, जिससे समान वितरण हो सके।
  • स्प्रेयर में समान दबाव बनाए रखना चाहिए जिससे कि रसायन का समान वितरण हो सके।
  • जिस यंत्र से शाकनाशी रसायन का छिड़काव हो उस यंत्र से कभी भी कीटनाशक व अन्य रसायन का छिड़काव नहीं करना चाहिए।
  • रसायन का छिड़काव करने के लिए शुष्क व तेज धूप का समय सबसे उत्तम होता है।
  • शाकनाशी रसायन का घोल कांच या एनेमल या प्लास्टिक के बर्तन में करना चाहिए।
  • शाकनाशी रसायन का प्रभाव बढ़ाने के लिए, मृदा में अधिक नमी का होना अति आवश्यक होता है।

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