भारत में पाई जाने वाली मृदा की विशेषताएं

भारत में पाई जाने वाली मृदा की विशेषताएं   

भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रकार की मृदायें पाई जाती हैं। फसल उत्पादन अथवा खेती करने के लिए मिट्टी अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है। हर राज्य की अर्थव्यवस्था में उस राज्य की मिट्टी का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
भारत में पाई जाने वाली मृदा की विशेषताएं
भारत में पाई जाने वाली मृदा की विशेषताएं 



मध्य प्रदेश में और भारत के हर राज्य में अलग-अलग प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं। प्रत्येक फसल की पैदावार मिट्टी पर ही निर्भर होती है। मध्य प्रदेश राज्य में सोयाबीन की खेती अत्यधिक होती है क्योंकि मध्यप्रदेश में दोमट मिट्टी अधिक मात्रा में पाई जाती है और सोयाबीन की खेती के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है।

इसलिए हर राज्य की अर्थव्यवस्था में उस राज्य की मिट्टी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत के अधिकतर लोग कृषि ही करते हैं। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में हर प्रकार की मिट्टी पाई जाती है।

भारत में पाई जाने वाली प्रमुख मृदाऐं


भारत में विभिन्न प्रकार की मृदाएँ पाई जाती हैं, भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मृदाओं को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया गया है -

  • लाल और पीली मृदा
  • काली मृदा
  • लाल दोमट मृदा
  • लाल बजरीली मृदा
  • लैटेराइट मृदा
  • लैटेराइट ( पुरानी जलोढ़ ) मृदा
  • गहरी काली या रेगुर मृदा
  • नाइसस से निर्मित और ट्रेप की मध्य काली मृदा
  • कम गहरी काली मृदा
  • काली ( अविभेदित ) मृदा
  • मिश्रित लाल और काली मृदा
  • जलोढ़ मृदा
  • समुद्रतटीय जलोढ़ मृदा
  • सिन्धु, यमुना और गंगा के मैदानों की धूसर और भूरी मिट्टी जिसमें लवण विभिन्न मात्रा में मिश्रित रहते हैं।
  • गंगा की जलोढ ( कंकरीली ) मृदा
  • लवणीय और क्षारीय मृदा
  • मरुस्थली ( धूसर ) मृदा
  • मरुस्थली ( भूरी ) मृदा
  • स्केलेटल मृदा
  • वनों एवं पर्वतों की ( अविभेदित ) मृदा
  • पतझड़ी वनों की भूरी मिट्टी
  • पहाड़ी चारागाही मिट्टी
  • राख मृदा
  • हिमनद और शाश्वत हिम
  • भावर तराई सहित उपपर्वतीय प्रदेश की मृदा तथा पीट



मध्यप्रदेश में कितने प्रकार की मिट्टी पाई जाती है

किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था में उस राज्य की मिट्टी का महत्वपूर्ण योगदान होता है।


मध्यप्रदेश में 5 प्रकार की मिट्टी पाई जाती है जो निम्नलिखित है -

1. लैटेराइट मृदाएँ ( Laterite Soils )

ये अत्यधिक अपक्षयित मृदाएँ होती हैं, जिनमें आयरन और ऐल्युमिनियम हाइड्रेट्स कोलॉइड की प्रधानता होती है और सिलिका निक्षालित होकर मृदा की निचली तहों पर एकत्रित हो जाता है। मृत्तिका प्रचुर मात्रा में पाई जाती है किंतु उनका गुण अचिपचिपा होता है। यह मिट्टी लाल रंग की होती है।

2. लाल-पीली मृदाएँ ( Red-yellow soils )

ये मृदाएँ कायान्तरित एवं रवेदार चट्टानों से बनी है, जिनमें नाइट्रस, ग्रेनाइट एवं फेरोमैग्नीशियम युक्त सिस्ट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इस मृदा का पीला रंग होने का मुख्य कारण फेरिक ऑक्साइड का जलीकरण होना है।

3. काली मृदा ( Black Soils )

लोहा तथा जीवांश की उपस्थिति के कारण इस मिट्टी का रंग काला होता है। पानी पड़ने पर यह मिट्टी चिपकती है, तथा सूखने पर बड़ी मात्रा में दरारें पड़ती है। यह मिट्टी ज्वालामुखी के फटने पर उसके लावे से बनती है। अतः इसमें अत्यधिक मात्रा में खनिज तत्व पाए जाते हैं। इसमें मुख्यतः लोहा, मैग्नीशियम, चूना तथा एल्युमिनियम खनिजों तथा जीवांशो की पर्याप्तता तथा फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटाश का अभाव होता है।

4. लाल बलुई मिट्टी ( Red sandy soil )

इस मिट्टी के रवे महीन तथा रेतीले होते हैं, इसमें लाल हेमेटाइट और पीले हेमेटाइट या लोहे के ऑक्साइड के मिश्रण के रूप में होने से लाल, पीला रंग होता है। इसमें लोहा, एल्युमीनियम तथा कार्टज के अंश मिलते हैं।

5. लाल दोमट मिट्टी ( Red loam soil )

इस मृदा का निर्माण नाइट्रस, डायोराइट आदि चीका प्रधान व अम्लरहित चट्टानों द्वारा होता है। इस मिट्टी का रंग लाल होता है। यह मिट्टी फसलों के लिए अच्छी मानी जाती है।

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